रविवार, 7 फ़रवरी 2010

वरीयता क्रम मत प्रणाली

बौद्धिक जनतंत्र में सरकार के चुनाव के लिए नागरिकों को मताधिकार उपयोग हेतु एक विशिष्ट चुनाव प्रणाली का प्रतिपादन किया गया है, जिसे 'वरीयता क्रम मत प्रणाली' नाम दिया गया है. इस प्रणाली में प्रत्येक मतदाता किसी एक प्रत्याशी को अपना मत न देकर तीन प्रत्याशियों को अपना वरीयता क्रम प्रदान करता है. इन क्रमों के मूल्य निम्न प्रकार निर्धारित हैं -
प्रथम वरीयता - ५ अंक
द्वितीय वरीयता - ३ अंक, तथा
तृतीय वरीयता - २ अंक.

मतदान के पश्चात् प्रत्येक प्रत्याशी के वरीयता अंको का योग प्राप्त किया जायेगा और जो प्रत्याशी कुल अंको का ५० प्रतिशत से अधिक तथा प्रत्याशियों में सर्वाधिक अंक प्राप्त करेगा, वही विजयी घोषित होगा. इसके तीन लाभ अपेक्षित हैं -
  1. प्रत्याशियों में परस्पर सहयोग करने की भावना उभरेगी ताकि एक प्रत्याशी के प्रथम वरीयता मतदाता दूसरे प्रत्याशियों को अपनी अन्य वरीयता प्रदान कर सकें. अतः चुनावों में अंतर्कलह न्यूनतम होगी.
  2. प्रत्येक मतदाता को सुविधा मिलेगी कि वह तीन प्रत्याशियों का मूल्यांकन करे और किसी एक तक सीमित न रहे. 
  3. विजित प्रत्याशी का प्रबाव क्षेत्र सीमित न रहकर विस्तृत प्राप्त होगा.
यद्यपि इस प्रणाली में एक बार की चुनाव प्रक्रिया में ही विजित प्रत्याशी को ५० प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का पूर्णतः अथवा अंशतः समर्थन अपेक्षित है, तथापि यह ५० प्रतिशत से न्यून होने पर चुनाव प्रक्रिया पुनः अपनाई जाएगी जिसमे केवल तीन प्रत्याशी हे मैदान में रहेंगे. इससे विजित प्रत्याशी का जनसमर्थन निश्चित रूप से व्यापक पाया जाएगा.

यदि चुनाव मैदान में केवल दो ही प्रत्याशी रहते हैं तो वरीयता अंक इस प्रकार दिए जाएँगे -
प्रथम वरीयता - 6 अंक, तथा 
द्वितीय वरीयता - 4 अंक.

जिससे कि विजित प्रत्याशी को एक बार में ही ५० प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त हो सकें, क्योंकि इस स्थिति में पुनः मतदान करना अव्यवहारिक होगा. .