बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

सरकार के अधिकार और कर्तव्य

बौद्धिक जनतंत्र जहाँ सरकार को नागरिकों के जीवन को अनुशासित करने के लिए विशिष्ट अधिकार प्रदान करता है वहीं यह सरकार को जीवन स्तर में सुधार और उसमें प्रसन्नता विकास के लिए उत्तरदायी भी बनाता है. सरकार के इसके अतिरिक्त कोई अन्य कर्तव्य नहीं हैं क्योंकि इन्हीमें वह सब कुछ समाहित है जो किसी राष्ट्र के विकास के लिए वांछित है.

नागरिक विकास
नागरिकों का सर्वांगीण विकास ही राष्ट्र का सर्वांगीण विकास होता है जिसके लिए प्रत्येक नागरिक स्वस्थ, शिक्षित और अनुशासित होना चाहिए. स्वस्थ और शिक्षा सेवाओं की निःशुल्क व्यवस्था करना और सभी नागरिकों को सामान रूप में अवसर प्रदान करना बौद्धिक जनतंत्र सरकार के अनिवार्य दायित्व हैं. नागरिकों को अनुशासित करने के लिए उनको निःशुल्क एवं त्वरित न्याय प्रदान करना भी सरकार का दायित्व है ताकि कोई नागरिक किसी अन्य नागरिक के साथ अन्याय करने का साहस ही न करे. इसके लिए सरकार को कठोर दंड व्यवस्था के लिए अधिकृत किया जाता है.

धर्म, संप्रदाय और स्वतंत्रता  
बौद्धिक जनतंत्र में प्रत्येक नागरिक को कोई भी धर्म अथवा संप्रदाय अपनाने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी किन्तु इसका सार्वजनिक प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा. इसका अर्थ यह भी है कि प्रत्येक नागरिक व्यक्तिगत स्तर पर ही स्वतंत्र होगा सामाजिक स्तर पर नहीं. सामाजिक स्तर पर उसे अनुशासित रहना होगा और इसका दायित्व सरकार का होगा. इस प्रकार नागरिक सीमित रूप में ही स्वतंत्र होंगे, पूर्ण रूप में नहीं. सार्वजनिक स्तर पर समाज और राष्ट्र के हित उसकी स्वतंत्रता को संयमित करेंगे.  

उद्योग एवं व्यवसाय
सरकार कोई उद्योग अथवा व्यवसाय कार्य नहीं करेगी, किन्तु प्रत्येक उद्योग एवं व्यवसाय को नियमित एवं नागारिकोंमुखी बनाये रखना सरकार का अधिकार भी है और दायित्व भी. इसके लिए बौद्धिक जनतंत्र के अंतर्गत दो स्थाई संवैधानिक आयोग कार्यरत रहेंगे - उत्पाद गुणता एवं मूल्य निर्धारण आयोग, तथा मांग पूर्वाकलन एवं उत्पादन नियोजन आयोग. ये आयोग सुनिश्चित करेंगे कि नागरिकों की सभी आवश्यकताएं उचित मूल्य पर उच्च गुणता वाले उत्पादों से आपूर्त हों. साथ ही देश में निम्न गुणता वाला कोई उत्पाद अनुमत ही नहीं होगा.  


सार्वजनिक सेवाएँ 
परिवहन, संचार, विद्युत्, जल, आदि सार्वजनिक सुविधाएं जहाँ राष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं वहीं नागरिकों के जीवन को भी सहज एवं सुविधाजनक बनाती हैं. सरकार इस प्रकार की लोई सेवा स्वयं प्रदान नहीं करेगी किन्तु इनकी समुचित उपलब्धि सरकार का दायित्व होगी, जो वह निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित एवं नियमित करते हुए करेगी.