शनिवार, 24 जुलाई 2010

भारत सधार हेतु संगठनात्मक रूपरेखा

भारत की स्थिति वास्तव में उग्र रूप से रुग्ण है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि बहुत सारे बुद्धिजीवी स्थिति में सुधार हेतु संगठन खड़े कर रहे हैं, जिनमें से कुछ राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहे हैं किन्तु अधिकाँश स्थानीय समस्याओं के समाधानों के प्रयासों में लगे हैं. यह सब अच्छा ही हो रहा है क्योंकि यही देश के बारे में लोगों की चिंता और चिंतन दर्शाता है.

स्थानीय संगठन
आज भारत में भ्रीष्टाचार और कुव्यवस्था शीर्षस्थ स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक पहुच गए हैं और ये लोगों को स्थानीय स्तर पर ही इतना पीड़ित कर रहे हैं कि वे राष्ट्रीय स्तर का चिंतन नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए लोगों में राष्ट्रीय भावना जागृत करने के लिए उन्हें स्थानीय समस्याओं से मुक्त करना अपरिहार्य हो गया है. राष्ट्रीय स्तर के संगठनों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे प्रत्येक स्थानीय समस्या को समझ नहीं सकते और न ही अपना सार्थक योगदान प्रदान कर पाते हैं. इसके लिए स्थानीय संगठन ही उपयोगी हो सकते हैं.

भारत विविध भाषाओँ, संस्कृतियों और जातियों का देश है, इसलिए लोगों की अपेक्षाएं भी विविध हैं. इनकी संतुष्टि के लिए स्थानीय संगठनों की आवश्यकता है जो लोगों को उनकी भाषा में उनके साथ सौहार्द स्थापित कर सकें. इनके माध्यम से यह आवश्यक नहीं कि लोगों की सभी समस्याएँ सुलझ जाएँ किन्तु इनके माध्यम से लोग आश्वस्त अवश्य किये जा सकते हैं. यह आश्वस्ति ही लोगों को राष्ट्रीय हित चिंतन का अवसर प्रदान कर सकती है.

राष्ट्रीय संगठन
अधिकाँश जन समस्याएँ स्थानीय होती हैं तथापि कुछ समस्याएँ ऐसी भी होती हैं जिनके मूल और समाधान राष्ट्रीय स्तर पर ही संभव होते हैं. इस प्रकार की समस्याओं के लिए राष्ट्र स्तर के संगठन की आवश्यकता है और इसे केवल उच्च स्तर की समस्याओं के समाधानों पर ही चिंतन एवं प्रयास करने चाहिए. यही संगठन स्थानीय संगठनों के महासंघ के रूप में भी कार्य करेगा, उन्हें मार्गदर्शन देगा तथा उनसे प्राप्त उच्च स्तरीय समस्याओं के समाधानों के प्रयास करेगा.

इस प्रकार के महासंघीय ढांचे में यह आवश्यक नहीं है कि राष्ट्रीय और स्थानीय संगठनों के नामों में कोई पूर्व निर्धारित समानता हों. साथ ही यह भी आवश्यक नहीं है कि स्थानीय संगठनों के स्थापन के समय ही राष्ट्रीय संगठन की भी स्थापना हो. पूरे देश में जनपद स्तर के स्थानीय संगठनों की तुरंत आवश्यकता है और उन्हें अपने कार्य यथाशीघ्र आरम्भ कर देने चाहिए.