सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

भृष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष

भारतीयों के नाम एक पत्र -

मित्रो, 

आज देश का समस्त जन-गन-मन राजनेताओं और प्रशासकों के भृष्टाचार से तृस्त है. इसके विरुद्ध, अनेक व्यक्ति और संगठन अपने-अपने तरीकों से संघर्ष कर रहे हैं. इसी प्रकार की एक पहल के रूप में,  ८७ वर्षीय और हम सबके पितातुल्य श्री अन्ना हजारे ने ५ अप्रैल २०११ से जंतर मंतर नयी दिल्ली पर आमरण भूख हड़ताल की घोषणा की है. उनकी मांग है की देश में तुरंत ऐसा क़ानून बनाया जाए कि भृष्टाचार का मामला प्रकाश में आने के तीन माह के अन्दर दोषियों को दण्डित किया जाये और उनकी अवैध संपत्ति जब्त कर ली जाए. यह हम सबके लिए लज्जा का विषय है कि हमारे वयोवृद्ध अपने जीवन का बलिदान करें और हम इसका तमाशा देखते रहें. 

कुछ संगठन और आधुनिक नेता इस वयोवृद्ध के जीवन को दांव पर लगाकर अपनी-अपनी नेतागिरी चमकाने में लगे हैं. मैंने उनसे आग्रह किया है कि उनके जीवन को दांव पर लगाने के स्थान पर हम सब बड़ी संख्या में आत्म-बलिदान के लिए प्रस्तुत हों, जिस पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया. अतः मैंने उक्त मांग के साथ स्वयं ५ अप्रैल २०११ से जंतर मंतर नयी दिल्ली पर आमरण भूख हड़ताल का निश्चय किया है जिसकी सूचना राष्ट्रपति महोदय और प्रधान मंत्री महोदय को दे दी है. साथ ही श्री अन्ना हजारे से निवेदन किया है कि वे भूख हड़ताल न करें और स्थल पर आत्म बलिदानियों की प्रेरणा हेतु उपस्थित रहें. 

आप सभी से मेरे निवेदन हैं कि -
  1. स्वयं ५ अप्रैल २०११ से जंतर मंतर, नयी दिल्ली पर मेरे साथ आमरण भूख हड़ताल के लिए प्रस्तुत हों और इसकी अग्रिम सूचना राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री महोदयों को दें. 
  2. जो व्यक्तिगत कारणों से ऐसा नहीं कर सकते, वे उक्त सत्याग्रह के समर्थन में जंतर मंतर पहुंचें और यथाशक्ति भूख हड़ताल करें और इस जन आन्दोलन के सहयोगी बनें. 
  3. दूर दराज़ के स्त्री-पुरुष जो नयी दिल्ली न पहुँच सकें, अपने-अपने गाँव, कसबे अथवा शहरों में ५ अप्रैल २०११ से यथाशक्ति भूख हड़ताल करें और इसकी अग्रिम सूचना सम्बंधित जिलाधिकारी को दें. 
  4. उपरोक्त जन आन्दोलन के लिए अपने परिवार जनों, मित्रों और परिचितों को प्रेरित करें जो ५ अप्रैल के बाद अपने-अपने घरों पर रहकर ही यथाशक्ति भूख हड़ताल करें.