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रविवार, 13 जून 2010

बौद्धिक जनतंत्र में तुरंत क्या किया जायेगा


बौद्धिक जनतंत्र संपूर्ण रूप में एक नवीन व्यवस्था है जिसमें शोषण के लिए कोई स्थान नहीं है. अतः अनेक शक्तिशाली लोग इसका विरोध भी करेंगे जिसके कारण संपूर्ण व्यवस्था को कारगर बनाने में कुछ समय लगेगा. दूसरे इसके लिए संविधान की नए सिरे से रचना की जायेगी जिसके लिए भी समय की अपेक्षा है. तथापि सुधरी व्यवस्था के अवसर प्राप्त होते ही जो कदम तुरंत उठाये जायेंगे वे निम्नांकित हैं -
  •  देश की न्याय व्यवस्था के प्रत्येक कर्मी को उस समय तक ८ घंटे प्रतिदिन एवं ७ दिन प्रति सप्ताह कार्य करना होगा जब तक कि ऐसी स्थिति न आ जाये कि वाद की स्थापना के तीन माह के अन्दर ही उसका निस्तारण न होने लगे. प्रत्येक न्यायालय को प्रतिदिन न्यूनतम एक दावे पर अपना निर्णय देना होगा.  
  • केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सर्वोच्च न्यायालय के अधीन कर वर्तमान राजनेताओं के कार्यकलापों के अन्वेषण कार्य पर लगाया जाएगा जिनके दोषी पाए जाने पर उनकी सभी सम्पदाएँ राज्य संपदा घोषित कर दी जायेंगी.
  • राजकीय पद के दुरूपयोग को राष्ट्रद्रोह घोषित किया जायेगा जिसके लिए त्वरित न्याय व्यवस्था द्वारा मृत्यु दंड दिए जाने का प्रावधान किया जाएगा जिससे भृष्टाचार पर तुरंत रोक लग सके.
  • देश में अनेक राजकीय श्रम केंद्र खोले जायेंगे जहाँ उत्पादन कार्य होंगे. ये केंद्र कारागारों का स्थान लेंगे. वर्तमान कारागारों में सभी बंदियों पर एक आयोग द्वारा विचार किया जाएगा, जिनमें से निर्दोषों को मुक्त करते हुए शेष को श्रम केन्द्रों पर अवैतनिक श्रम हेतु नियुक्त कर दिया जाएगा.
  •  देश में सभी प्रकार नशीले द्रव्यों के उत्पादन एवं वितरण पर तुरंत रोक लगा दी जायेगी जिसके उल्लंघन पर मृत्युदंड का प्रावधान होगा.
  • सभी शहरी विकास कार्यों पर तुरंत रोक लगाते हुए उनकी केवल देखरेख की जायेगी. इसके स्थान पर ग्रामीण विकास पर बल दिया जाएगा और वहां सभी आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जायेंगी. 
  • कृषि उत्पादों के मूल्य उनकी सकल लागत के अनुसार निर्धारित कर कृषि क्षेत्र को स्वयं-समर्थ लाभकर व्यवसाय बनाया जायेगा जिससे कि भारतीय अर्थ व्यवस्था की यह मेरु सुदृढ़ हो. इससे खाद्यान्नों के मूल्यों में वृद्धि होगी, जिसको ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की जायेगी.
  • विकलांगों और वृद्धों के अतिरिक्त शेष जनसँख्या के लिए चलाई जा रही सभी समाज कल्याण योजनायें बंद कर दी जायेंगी और इससे बचे धन के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसाधन और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया जायेगा ताकि छोटे कृषकों को दूसरी आय के साधन प्राप्त हों और उन्हें अपनी कृषि भूमि विक्रय की विवशता न हो और भूमिहीनों को घर बैठे ही रोजगार उपलब्ध हों.
  • ६५ वर्ष से अधिक आयु के सभी वृद्धों को सम्मानजनक जीवनयापन हेतु पेंशन दी जायेगी, तथा राजकीय सेवा निवृत कर्मियों की सभी पेंशन बंद कर दी जायेंगी. साथ ही सेना और पुलिस के अतिरिक्त राजकीय सेवा से निवृत्ति की आयु ६५ वर्ष कर दी जायेगी.  
  • पुलिस और सेना के प्रत्येक कर्मी की कठोर कर्मों हेतु शारीरिक शौष्ठव का प्रति वर्ष परीक्षण अनिवार्य होगा जिसमें अयोग्य होने पर उन्हें सेवा निवृत कर दिया जायेगा. 
  • प्रांतीय विधान सभा सदस्यों के वेतन ५,००० रुपये प्रतिमाह, प्रांतीय मंत्रियों, राज्यपालों एवं संसद सदस्यों के वेतन ६,००० रुपये प्रतिमाह, केन्द्रीय मंत्रियों के वेतन ७,००० रुपये प्रतिमाह, तथा राष्ट्राध्यक्ष का वेतन ८,००० रुपये प्रतिमाह पर ५ वर्ष के लिए सीमित कर दिए जायेंगे. इसके अतिरिक्त इनके राजकीय कर्तव्यों पर वास्तविक व्ययों का भुगतान किया जाएगा अथवा निःशुल्क सुविधाएं दी जायेंगी.
  • राज्य कर्मियों के न्यूनतम एवं अधिकतम सकल वेतन ७,००० से १०,००० के मध्य कर दिए जायेंगे. इसके अतिरिक्त उन्हें कोई भत्ते देय नहीं होंगे. राज्य कर्मियों के लिए सभी आवासीय कॉलोनियां नीलाम कर दी जायेंगी और उन्हें निजी व्यवस्थाओं द्वारा जनसाधारण के मध्य रहना होगा. साथ ही कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के सभी पद समाप्त होंगे.   
  • राजनैतिक दलों को प्राप्त मान्यताएं और अन्य सुविधाएं समाप्त कर दी जायेंगी, तथापि वे स्वयं के स्तर पर संगठित रह सकते हैं. 
  •  देश में सभी प्रकार की आरक्षण व्यवस्थाएं समाप्त कर दी जायेंगी.
  • निजी क्षेत्र की सभी शिक्षण संस्थाएं बंद कर दी जायेंगी तथा राज्य संचालित सभी संस्थानों में सभी को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जायेगी. आवश्यकता होने पर नए संस्थान खोले जायेंगे. 
  • सेना देश की रक्षा के अतिरिक्त सार्वजनिक संपदाओं, जैसे वन, भूमि, जलस्रोत आदि के संरक्षण का दायित्व सौंपा जाएगा जिससे उस पर किये जा रहे भारी व्यय का सदुपयोग हो सके. इसके अंतर्गत सार्वजनिक संपदाओं पर व्यक्तिगत अधिकार के लिए सैन्य न्यायालयों में कार्यवाही की जा सकेगी. 
  • सभी धर्म, सार्वजनिक धार्मिक अनुष्ठानों एवं संस्थानों पर पूर्ण रोक लगा दी जायेगी और धर्म स्थलों को शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित कर दिया जायेगा. सार्वजनिक स्तर पर प्रत्येक मनुष्य को केवल मनुष्य बन कर रहना होगा.        
हम जानते हैं कि इनमें से अनेक प्रावधानों का घोर विरोध होगा किन्तु यह सब राष्ट्र हित में होने के कारण बौद्धिक जन समुदाय पर जन साधारण को सुशिक्षित करने का भारी दायित्व आ पड़ेगा. आवस्यकता होने पर सेना की सहायता ली जायेगी.